जमशेदपुर, 9 अक्टूबर। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, उत्पादकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और समावेशी आर्थिक प्रगति को गति देने के उद्देश्य से एक्सएलआरआई–जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, जमशेदपुर में 13वें डॉ. वर्गीज कुरियन स्मृति सतत विकास व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। एक्सएलआरआई के फ्र अरुपे सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड सस्टेनेबिलिटी (FACES) की ओर से आयोजित इस वार्षिक व्याख्यान में सहकारिता आंदोलन, ग्रामीण सशक्तीकरण और टिकाऊ विकास के क्षेत्र में डॉ. वर्गीज कुरियन के योगदान को याद किया गया।

इस वर्ष के व्याख्यान का विषय ‘राष्ट्र निर्माण में उत्पादकों की भूमिका: भारत में विकास, संस्थाओं और समावेशन की नई परिकल्पना’ रहा। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि किसान, कारीगर, ग्रामीण उद्यमी और अन्य उत्पादक देश की आर्थिक प्रगति में किस प्रकार निर्णायक भूमिका निभाते हैं। वक्ताओं ने उत्पादकों को केवल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आर्थिक व्यवस्था में भागीदार और विकास प्रक्रिया का सक्रिय नेतृत्वकर्ता बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

अपने संबोधन में नाबार्ड अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी ने डॉ. वर्गीज कुरियन की संस्थागत सोच और सहकारिता आधारित विकास मॉडल की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उत्पादकों को सशक्त बनाने के लिए ऐसी संस्थाओं की जरूरत है, जिनमें उनका स्वामित्व, भागीदारी और निर्णय लेने की भूमिका सुनिश्चित हो। उन्होंने उत्पादन आधारित विकास को बढ़ावा देने, उत्पादक-केंद्रित संस्थाओं को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमों के विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, सामूहिक स्वामित्व और स्थानीय स्तर पर उद्यमों के विकास से ग्रामीण समुदायों के भीतर आर्थिक मूल्य को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और ग्रामीण आजीविका को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकेगा। डॉ. शाजी कृष्णन वी ने ग्रामीण विकास को जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक सक्षम बनाने की जरूरत भी रेखांकित की। उन्होंने संस्थागत सहयोग, नवाचार और समावेशी विकास को ऐसी अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया, जिसमें विकास का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे।
नाबार्ड अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी को वाणिज्यिक बैंकिंग, विकास वित्त, ग्रामीण एवं सहकारी बैंकिंग, डिजिटल परिवर्तन और वित्तीय समावेशन के क्षेत्रों में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उनके कार्यक्षेत्र में सहकारी क्षेत्र में सुधार, फिनटेक, डेटा एनालिटिक्स, जलवायु वित्त और नवाचार आधारित ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे हैं। व्याख्यान के दौरान इन क्षेत्रों की भूमिका को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के भविष्य से जोड़कर देखा गया। कार्यक्रम ने इस विचार को प्रमुखता दी कि वित्तीय संस्थाओं, उत्पादक संगठनों और ग्रामीण उद्यमियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर विकास की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में फ्र अरुपे सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड सस्टेनेबिलिटी (FACES) की वार्षिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। केंद्र के अध्यक्ष डॉ. टाटा एल. रघु राम ने रिपोर्ट के माध्यम से केंद्र की गतिविधियों, शोध परियोजनाओं और ग्रामीण समुदायों के साथ किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। FACES जैव विविधता, सर्कुलर इकोनॉमी और कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी जैसे विषयों पर वित्तपोषित शोध परियोजनाओं के माध्यम से जिम्मेदार प्रबंधन की अवधारणा को आगे बढ़ा रहा है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्यक्ष सहभागिता कार्यक्रम, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) नेतृत्व में स्नातकोत्तर प्रमाणपत्र कार्यक्रम तथा जनजातीय और वन आधारित उद्यमों को प्रोत्साहित करने जैसी पहलें शामिल हैं। केंद्र XCITE और JIDCO के माध्यम से जनजातीय एवं वन आधारित उद्यमों को इनक्यूबेशन सहायता भी प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ESG) तथा जैव विविधता नीति से जुड़े विषयों में योगदान देने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। केंद्र की भावी योजनाओं में सरकारों को नीतिगत सलाह देने और प्रकृति को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने के साथ-साथ दलमा क्षेत्र को जनजातीय उद्यमों से संबंधित शोध के लिए एक प्रयोगात्मक केंद्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना भी शामिल है।
मुख्य व्याख्यान से पहले डॉ. शाजी कृष्णन वी ने एक्सएलआरआई के काउंसिल फॉर इनोवेशन, टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप (XCITE) का दौरा किया। यहां उन्होंने ग्रामीण व्यवसाय इनक्यूबेशन पहल से जुड़े 15 संस्थापकों और उद्यमियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उद्यमियों ने अपने व्यवसाय, उत्पादों, नवाचारों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी साझा की। इस संवाद में ग्रामीण उद्यमिता के सामने मौजूद अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा हुई। उभरते उद्यमियों को बाजार, वित्तीय सहायता, तकनीकी नवाचार और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। XCITE, एक्सएलआरआई की एक पहल है, जिसे नाबार्ड का सहयोग प्राप्त है। इसका उद्देश्य कृषि व्यवसाय, ग्रामीण नवाचार और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े ऐसे उद्यमों को प्रोत्साहित करना है, जो सामाजिक प्रभाव के साथ समावेशी और टिकाऊ विकास को बढ़ावा दे सकें।
ग्रामीण उद्यमियों के साथ संवाद के दौरान डॉ. शाजी कृष्णन वी ने पिछले छह महीनों में XCITE की ओर से हुई प्रगति और विकसित किए गए विशिष्ट व्यावसायिक सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि नवाचार आर्थिक विकास को गति देने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और विभिन्न क्षेत्रों के बीच विकास का संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए पूंजीगत सहयोग, क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे और डिजिटल पहलों के माध्यम से उत्पादक संगठनों को मजबूत करने की नाबार्ड की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने उभरते उद्यमों को प्रोत्साहन देने और उन्हें विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
डॉ. वर्गीज कुरियन स्मृति व्याख्यान और ग्रामीण उद्यमियों के साथ संवाद के माध्यम से एक्सएलआरआई ने सतत विकास, जिम्मेदार नेतृत्व और समावेशी आर्थिक प्रगति से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श का मंच उपलब्ध कराया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि ग्रामीण भारत की आर्थिक क्षमता को मजबूत करने के लिए उत्पादकों को विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखना, सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाना और नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना आवश्यक है। शिक्षा संस्थानों, वित्तीय संगठनों, नीति निर्माताओं और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय से ग्रामीण विकास को नई दिशा मिल सकती है।
एक्सएलआरआई अपनी शैक्षणिक, शोध और सामाजिक पहलों के माध्यम से जिम्मेदार प्रबंधन तथा सतत विकास की अवधारणा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्थान का ‘फॉर द ग्रेटर गुड’ (समाज के व्यापक हित के लिए) का मूल विचार भी इसी दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है।
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